Panchi Nadiya Pavan Ke Jhonke Lyrics in Hindi – Refugee

panchi nadiya pawan ke jhonke lyrics
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पंछी नदिया पवन के झोंके लिरिक्स Panchi Nadiya Pawan Ke Jhonke Lyrics from Abhishek Bachchan, Kareena Kapoor Debut Film Refugee. Sung by Sonu Nigam and Alka Yagnik. Music composed by Anu Malik and Javed Akhtar penned the lyrics.

Song Credits:
Song Title/गाना: पंछी नदिया पवन के झोंके panchi nadiya pawan ke jhonke
Movie:

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रेफूजी Refugee (Year-2000)
Singer/गायक: अलका याज्ञिक Alka Yagnik, सोनु निगम Sonu Nigam
Music Director/संगीतकार: अनु मलिक Anu Malik
Lyrics Writer/गीतकार: जावेद अख्तर Javed Akhtar
Star casts/अभिनीत किरदार: Abhishek Bachchan,Kareena Kapoor,Sunil Shetty,Jackie Shroff and Sudesh Berry

Panchi Nadiya Pawan Ke Jhonke Lyrics in Hindi

ऊपर वाले ने अपनी मोहब्बत के सदके में
हम सबके लिए ये धरती बनाई थी
पर मोहब्बत के दुश्मनों ने
इस पर लकीरें खीच के सरहदें बना दी

मैं जानता हूँ वो लोग तुम्हें इस पार नहीं आने देगें
मगर ये पवन जो तुम्हारे यहाँ से होकर आयी है
तुम्हें छू कर आयी होगी
मैं इसे साँस बना कर अपने सीने में भर लूँगा

ये नदियाँ जिसपर झुक कर तुम पानी पिया करते हो
मैं इसके पानी से अपने प्यासे होंठों को भिगो लूँगी
समझूँगी तुम्हारे होंठों को छू लिया

पंछी, नदिया, पवन के झोंके
कोई सरहद ना इन्हें रोके
पंछी, नदिया, पवन के झोंके
कोई सरहद ना इन्हें रोके

सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो तुमने और मैंने
क्या पाया, इंसाँ होके

पंछी, नदिया, पवन के झोंके
कोई सरहद ना इन्हें रोके
सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो तुमने और मैंने
क्या पाया, इंसाँ होके

जो हम दोनों पंछी होते
तैरते हम इस नील गगन में, पंख पसारे
सारी धरती अपनी होती
अपने होते सारे नज़ारें

खुली फ़िज़ाओं में उड़ते
खुली फ़िज़ाओं में उड़ते
अपने दिलों में हम सारा, प्यार समाके

पंछी, नदिया, पवन के झोंके
कोई सरहद ना इन्हें रोके
सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो तुमने और मैंने
क्या पाया, इंसां होके

जो मैं होती नदिया और तुम
पवन के झोंके तो क्या होता
हो ओ, जो मैं होती नदिया और तुम
पवन के झोंके तो क्या होता

पवन के झोंके नदी के तन को
जब छूते हैं
पवन के झोंके नदी के तन को
जब छूते हैं
लहरें ही लहरें बनती हैं
हम दोनों जो मिलते तो कुछ ऐसा होता

सब कहते ये लहर-लहर जहाँ भी जायें
इनको ना कोई टोके

पंछी, नदिया, पवन के झोंके
कोई सरहद ना इन्हें रोके
सरहदें इंसानों के लिए हैं
सोचो तुमने और मैंने
क्या पाया इंसाँ होके

पंछी, नदिया, पवन के झोंके
कोई सरहद ना इन्हें रोके

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